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श्याम नारायण 'कुन्दन' की कहानी - लव मैरिज

love marriage

’सतीश ये मेरी पत्नी शैलजा जी हैं। कुछ दिन पहले ही हमलोगों ने लव मैरिज
की।’
लगभग चार साल के लम्बे अन्तराल के बाद अचानक हुए एक मुलाकात के
अवसर पर मेरे मित्र राघवेन्द्र ने अपने बगल में बैठी…

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रचनाकार के पाठकों के पत्र

यूँ तो रचनकार की रचनाओं पर त्वरित टिप्पणियों की सुविधा है, मगर बहुत से पाठक इसे सब्सक्राइब कर पढ़ते हैं और ईमेल से भी इनकी रचनाओं को फारवर्ड करते हैं. ऐसे में कभी कभार होता यह है कि पाठकों की…

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प्रमोद भार्गव की पुस्तक समीक्षा - हेमन्तिया उर्फ... देह मण्डी का आंचलिक सौंदर्य

देह मण्‍डी का आंचिलक सौंदर्य

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अजीब विडंबना है कि भारत के कुछ समाजों में समय और समाज ने देह व्‍यापार के अभिशाप को भी सामाजिक संस्‍कार का रूप दिया हुआ है। मध्‍यप्रदेश के सागर जिले में रहने…

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गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' के ठंड से ठिठुरते दोहे

ठंड से ठिठुरते दोहे

thand se thithurte dohe
कुहरे की आकाश से , शाम हुई क्या बात।
सुबह-सुबह ही लूट ली, सूरज की बारात।।


ठिठुर-ठिठुर कर ठंड से,होती है बेहाल।
कौन लूट कर ले गया ‘पश्मीना’ की शाल ।।


पाँचों…

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संजय दानी की ग़ज़ल

जब से दिलों की गलियों में ईमान बिकते हैं,

बस तब से राहे-इश्क़ बियाबान लगते हैं।

ग़म से भरी है दास्तां मेरी जवानी की,

बाज़ारे-इश्क़ मे सदा अरमान सड़ते हैं।

साहिल के घर का ज़ुल्म बहुत झेला है…

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विजय वर्मा की हास्य व्यंग्य कविता व ग़ज़ल

बदलती फिज़ा

माना कि पैसों की अहमियत बहुत है,

इस शहर में मगर आदमियत नहीं है.

विष-बुझे व्यंग्य -बाणों की होती है वर्षा

फिज़ा में इन्द्र-धनुषी रूमानियत नहीं है

कुछ मुस्कुराते हुए चेहरे है…

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शशांक मिश्र‘‘भारती'' के बाल गीतः-

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एकः-

जाड़े की ऋतु

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खुशियों को साथ लिए

सुन्‍दर सपने हजार लिए

ऋतु जाड़े की आ गई

पवन सर-सराने लगी

दांत बजवाने लगी

सतरंगी परिवेश लिए

ऋतु जाड़े की आ गई

सरदी के बढ़े हैं गात

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अंकित फ़ादिया कौन? एथिकल हैकर या नॉन-एथिकल साहित्यिक-चौर्य लेखक?

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अंकित फ़ादिया को आप जानते हैं?

कितना?

आह! इंटरनेट आपको तमाम विश्व में देखते देखते मशहूर कर सकता है तो एक मिनट में आपकी मिट्टी भी पलीत कर सकता है.

अंकित फ़ादिया से बढ़िया उदाहरण और…

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प्रमोद भार्गव का आलेख : आर्थिक घोटालों की पृष्‍ठभूमि में भूमि सुधार

कौटिल्य समग्र प्रजाहित को राजा की जवाबदारी मानते थे। कार्ल मार्क्‍स भी सर्वहारा के प्रति चिंतित रहे। इसलिए उनका अर्थचिंतन किसान और मजदूर के प्रति समर्पित है। गांधी और विनोबा भावे का तो समग्र…

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चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव की कविता - कहो मेरे प्रिय नए साल इस बार मैं तुम्‍हें क्‍या दूँ ?

र नए साल की अगवानी में

हर बार मैं उसे

एक नई कविता का उपहार देता हूँ।

कहो मेरे प्रिय नए साल

इस बार मैं तुम्‍हें क्‍या दूँ ?

किस स्‍याही से

कौन सी कविता लिखूँ ?

पिछली बार जब तुम आए थे

मैंने…

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रवीन्द्र अग्निहोत्री का आलेख - अपराधी कौन? मैकाले या हम?

पनी वर्तमान शिक्षा की जिन बातों को लेकर समाज में असंतोष है उनमें से एक है ” शिक्षा का माध्यम “. अंग्रेजी का शिक्षा के माध्यम के रूप में अधिकृत और व्यवस्थित प्रयोग तो लार्ड मैकाले के उस विवरण…

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शशांक मिश्र ‘‘भारती'' की रचनाएँ

एकः-

विश्‍वास रूपी दीपक जो जलाते रहें,
मंजिल की समीपता आप पाते रहें।

गीत विश्‍वासों के निःस्‍वर होते नहीं,
सुबह के प्रिय दृश्‍य आप गाते रहें।

हृदय की कुण्‍ठा का पास आना क्‍या,
सत्‍य पर निष्‍ठा…

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सतीश वर्मा की कविताएँ

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सतीश वर्मा ने अपने कई काव्य संग्रह प्रकाशित किये हैं बड़ी उग्र और नितान्त मौलिक शैली में। आपको आघात लगता है, रोष उत्पन्न होता है और हिंसा के साथ शब्द शब्द सामना होता है। कहीं अंगुली नहीं…

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असग़र वजाहत का संस्मरण - 'फ़ैज' पर कुछ अलग ढंग से

असगर वजाहत का एक संस्मरण ई-बुक पर पढ़िए उनकी अपनी ही हस्तलिपि में - ‘फ़ैज’ पर अलग ढंग से. बड़े आकार में पढ़ने के लिए ई-बुक के नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें. अथवा इस कड़ी पर क्लिक करें.

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संजय दानी की ग़ज़ल - बस प्यार है

प्यार बस प्यार है

प्यार बस प्यार है दोस्तों,
ज़ीस्त का सार है दोस्तों।

चांदनी बेवफ़ा है अगर,
चांद की हार है दोस्तों ।

मुल्क में मूर्खों का राज गर,
ग्यान बेकार है दोस्तों।

इश्क़ के हाट…