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संजय दानी की ग़ज़ल - बस प्यार है

प्यार बस प्यार है

प्यार बस प्यार है दोस्तों,
ज़ीस्त का सार है दोस्तों।

चांदनी बेवफ़ा है अगर,
चांद की हार है दोस्तों ।

मुल्क में मूर्खों का राज गर,
ग्यान बेकार है दोस्तों।

इश्क़ के हाट…