शशांक मिश्र ‘‘भारती'' की रचनाएँ
एकः-
विश्वास रूपी दीपक जो जलाते रहें,
मंजिल की समीपता आप पाते रहें।
गीत विश्वासों के निःस्वर होते नहीं,
सुबह के प्रिय दृश्य आप गाते रहें।
हृदय की कुण्ठा का पास आना क्या,
सत्य पर निष्ठा…
एकः-
विश्वास रूपी दीपक जो जलाते रहें,
मंजिल की समीपता आप पाते रहें।
गीत विश्वासों के निःस्वर होते नहीं,
सुबह के प्रिय दृश्य आप गाते रहें।
हृदय की कुण्ठा का पास आना क्या,
सत्य पर निष्ठा…