प्रमोद भार्गव का आलेख : आर्थिक घोटालों की पृष्ठभूमि में भूमि सुधार

कौटिल्य समग्र प्रजाहित को राजा की जवाबदारी मानते थे। कार्ल मार्क्स भी सर्वहारा के प्रति चिंतित रहे। इसलिए उनका अर्थचिंतन किसान और मजदूर के प्रति समर्पित है। गांधी और विनोबा भावे का तो समग्र…