शशांक मिश्र‘‘भारती'' के बाल गीतः-

एकः-
जाड़े की ऋतु
-
खुशियों को साथ लिए
सुन्दर सपने हजार लिए
ऋतु जाड़े की आ गई
पवन सर-सराने लगी
दांत बजवाने लगी
सतरंगी परिवेश लिए
ऋतु जाड़े की आ गई
सरदी के बढ़े हैं गात

एकः-
जाड़े की ऋतु
-
खुशियों को साथ लिए
सुन्दर सपने हजार लिए
ऋतु जाड़े की आ गई
पवन सर-सराने लगी
दांत बजवाने लगी
सतरंगी परिवेश लिए
ऋतु जाड़े की आ गई
सरदी के बढ़े हैं गात