गंगाप्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' के ठंड से ठिठुरते दोहे
ठंड से ठिठुरते दोहे

कुहरे की आकाश से , शाम हुई क्या बात।
सुबह-सुबह ही लूट ली, सूरज की बारात।।
ठिठुर-ठिठुर कर ठंड से,होती है बेहाल।
कौन लूट कर ले गया ‘पश्मीना’ की शाल ।।
पाँचों…
ठंड से ठिठुरते दोहे

कुहरे की आकाश से , शाम हुई क्या बात।
सुबह-सुबह ही लूट ली, सूरज की बारात।।
ठिठुर-ठिठुर कर ठंड से,होती है बेहाल।
कौन लूट कर ले गया ‘पश्मीना’ की शाल ।।
पाँचों…