ये सिर्फ़ एक शहर नहीं ; इंसानियत की <b>...</b>
कोई चाह रहा है करो इसे बंद कोई चाह रहा है खुला रहे ये ग़रीब कुलबुला रहा है महंगाई में अमीर मना रहा है पिकनिक उसे मिल गया है सप्ताहांत …